आसिफनगरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1983
अफजाल शरीफ (निर्दलीय) ने 1983 के विधान सभा चुनाव में 46.0% वोट पाकर आसिफनगर सीट जीती और बी. कृष्ण (INC) को 14,427 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 213 चारमीनार थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 213 गुंटूर पश्चिम है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — अफजाल शरीफ 22.9% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अफजाल शरीफ निर्दलीय | निर्दलीय | 28,94846.0% |
| 2 | बी. कृष्ण कांग्रेस (इंदिरा) | कांग्रेस (इंदिरा) | 14,52123.1% |
| 3 | सी. गंगा भवानी निर्दलीय | निर्दलीय | 12,54719.9% |
| 4 | तुलसी राम | 5,7619.2% | |
| 5 | एम. श्याम राव जनता | जनता | 8281.3% |
| 6 | वेंकट राव निर्दलीय | निर्दलीय | 1060.2% |
| 7 | बी. बी. एस. चौधरी निर्दलीय | निर्दलीय | 1050.2% |
| 8 | पी. श्रीनिवास निर्दलीय | निर्दलीय | 780.1% |
| 9 | एस. सोमा सुन्दर निर्दलीय | निर्दलीय | 440.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.19 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
आसिफनगर से कौन जीता, 1978–2004
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1978 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1978 के 57.1% से घटकर 54.1% रह गया। इसके बाद 1985 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।