खानापुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
अजमेरा गोविन्द नाईक (निर्दलीय) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 43.3% वोट पाकर खानापुर सीट जीती और बनोतु जालम सिंह (TDP) को 8,502 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 243 मंथनी थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 243 बद्वेल है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — अजमेरा गोविन्द नाईक 16.7% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अजमेरा गोविन्द नाईक निर्दलीय | निर्दलीय | 22,01443.3% |
| 2 | बनोतु जालम सिंह Telugu Desam Party | Telugu Desam Party | 13,51226.6% |
| 3 | कोटनाक भीम राव निर्दलीय | निर्दलीय | 9,75819.2% |
| 4 | अंबाजी जादव | 5,60411.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.26 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
खानापुर से कौन जीता, 1978–2004
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1983 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1983 के 53.8% से बढ़कर 56.5% हो गया। इसके बाद 1989 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।