कारवानविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
बी. बाल रेड्डी (BJP) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 50.8% वोट पाकर कारवान सीट जीती और मोहम्मद विरासत रसूल खान (निर्दलीय) को 9,777 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 215 सिकंदराबाद कैंट थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 215 चिलकलूरिपेट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
10.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बी. बाल रेड्डी | 46,59750.8% | |
| 2 | मोहम्मद विरासत रसूल खान निर्दलीय | निर्दलीय | 36,82040.1% |
| 3 | प्रभावती | 6,5127.1% | |
| 4 | मोहम्मद बक़ीर निर्दलीय | निर्दलीय | 7470.8% |
| 5 | राम राज निर्दलीय | निर्दलीय | 4970.5% |
| 6 | बी. सत्यनारायण निर्दलीय | निर्दलीय | 1740.2% |
| 7 | पंडित राजाराम शास्त्री निर्दलीय | निर्दलीय | 1200.1% |
| 8 | लईक अली निर्दलीय | निर्दलीय | 1140.1% |
| 9 | चतुर सिंह शास्त्री निर्दलीय | निर्दलीय | 660.1% |
| 10 | एम. मल्लेश्वर निर्दलीय | निर्दलीय | 640.1% |
| 11 | रणवीर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 420.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, एक निर्दलीय और INC को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.36 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कारवान से कौन जीता, 1978–2004
BJP ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1983 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1978 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1983 के 63.0% से बढ़कर 73.6% हो गया। इसके बाद 1989 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।