कारवानविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1994
बद्दम बाल रेड्डी (BJP) ने 1994 के विधान सभा चुनाव में 42.1% वोट पाकर कारवान सीट जीती और सैयद सज्जाद (MIM) को 13,293 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 215 सिकंदराबाद कैंट थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 215 चिलकलूरिपेट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
9.2% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
13 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बद्दम बाल रेड्डी | 60,95842.1% | |
| 2 | सैयद सज्जाद MIM | MIM | 47,66533.0% |
| 3 | एम. राजेन्द्र | 20,88114.4% | |
| 4 | मीर इकबाल अली | 5,1673.6% | |
| 5 | लईक अली MBT | MBT | 5,0003.5% |
| 6 | महमूद मोहिउद्दीन | 3,6502.5% | |
| 7 | इब्राहिम निर्दलीय | निर्दलीय | 4780.3% |
| 8 | बी. यादय्या | 1990.1% | |
| 9 | सैयद जलानी अली निर्दलीय | निर्दलीय | 1860.1% |
| 10 | डी. शंकर सिंह RPP | RPP | 1620.1% |
| 11 | डी. नरसिंग राव निर्दलीय | निर्दलीय | 1300.1% |
| 12 | शाकेर एजाज निर्दलीय | निर्दलीय | 1300.1% |
| 13 | पंगला नरसिंहलू यादव SWP | SWP | 500.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.22 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कारवान से कौन जीता, 1978–2004
BJP ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1985 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 45.3% से घटकर 42.1% रह गया। मतदान प्रतिशत 1989 के 65.6% से घटकर 61.2% रह गया। इसके बाद 1999 के चुनाव में यह सीट AIMIM ने जीती।