वही कहानी, नया नाम
क्या हुआ
इस चुनाव में फिर एकतरफ़ा परिणाम आया: एक पार्टी ने विधान सभा का भारी हिस्सा जीत लिया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 147 सीटों में से 117 सीटें जीतीं।
यह अकेले सरकार चलाने के लिए ज़रूरी 74 सीटों के आँकड़े से काफ़ी ऊपर था; यह भारी जीत थी।
जनता पार्टी 21 सीटों के साथ काफ़ी पीछे दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
यहाँ पिछला चुनाव उसी नाम के थोड़े अलग रूप वाली पार्टी ने जीता था।
उस साल विजेता इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) थी; इस साल कांग्रेस सबसे आगे रही।
लगभग 51.2% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो पिछले चुनाव से ज़्यादा था।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: बालासोर, ओडिशा का फ़ैसला सिर्फ़ 69 वोटों से हुआ।
दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) आठगढ़, ओडिशा में रहा, 77.3% वोट।
साल का सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) काकटपुर, ओडिशा में दर्ज हुआ, 74.6%।
किसी भी सीट में सबसे ज़्यादा पंजीकृत मतदाता राउरकेला, ओडिशा में थे, 1,49,004।
पृष्ठभूमि
पहली दो पार्टियों के अलावा बाक़ी सीटें छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों में बँटीं।
कुल मिलाकर 5 दलों ने कम से कम एक सीट जीती, और 7 निर्दलीय भी जीते।