लगातार पाँचवीं जीत
क्या हुआ
बीजू जनता दल फिर जीता और पहली बार सत्ता में आने के बाद से उसका अटूट सिलसिला बना रहा।
अब वह लगातार 5 चुनाव जीत चुकी थी।
बीजद ने कुल 146 सीटों में से 112 सीटें जीतीं।
यह 74 सीटों के बहुमत के आँकड़े से आराम से ऊपर था।
क्या बदला
बदलाव का सबसे साफ़ संकेत यह नहीं था कि कौन जीता, बल्कि यह कि विपक्ष ने कितनी ज़मीन हासिल की।
सीटों का सबसे बड़ा बहाव बीजद से भारतीय जनता पार्टी की ओर रहा।
उस साल तुलना की गई 146 सीटों में से 18 सीटें इसी तरह गईं।
भाजपा के अपने (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) पिछले चुनाव से 14.5 प्रतिशत अंक उछला।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: कांटाबांजी, ओडिशा का फ़ैसला सिर्फ़ 128 वोटों से हुआ।
दूसरी ओर, खंडपड़ा, ओडिशा में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 60.5% वोट रहा, जो पूरे राज्य के सबसे एकतरफ़ा परिणामों में से एक था।
पूरे राज्य में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को 1.0% वोट मिले।
साल का सबसे अच्छा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) डाबुगाम, ओडिशा में रहा, 83.0%।
पृष्ठभूमि
इस समय तक वही नेता पहली बार पद सँभालने के बाद से लगातार राज्य सरकार की कमान सँभाले हुए थे।