लगातार चौथी जीत, और पहले से बड़ी
क्या हुआ
बीजू जनता दल फिर जीता, पहले से भी बड़ी जीत के साथ।
बीजद ने कुल 147 सीटों में से 117 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 43 ज़्यादा था।
उसे 43.4% वोट भी मिले।
क्या बदला
बीजद की जीत का सिलसिला जारी रहा, और हर बार वह और मज़बूत होता गया।
अब वह लगातार 4 चुनाव जीत चुकी थी।
पिछले चुनाव के मुक़ाबले उसकी अपनी सीटें 14 बढ़ीं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) बढ़कर 73.8% हो गया, जो तब तक ओडिशा के किसी विधान सभा चुनाव में दर्ज सबसे ऊँचा था।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: मोहना, ओडिशा का फ़ैसला सिर्फ़ 115 वोटों से हुआ।
दूसरी ओर, हिंजिली, ओडिशा में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 62.8% वोट रहा, जो पूरे राज्य के सबसे एकतरफ़ा परिणामों में से एक था।
यह पहला चुनाव भी था जिसमें ओडिशा के मतपत्र पर (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) का विकल्प था, और उसे 1.3% वोट मिले।
साल का सबसे अच्छा मतदान प्रतिशत डाबुगाम, ओडिशा में रहा, 84.8%।
पृष्ठभूमि
इस समय तक बीजद पहली बार सत्ता में आने के बाद से एक भी चुनाव नहीं हारा था।