ओडिशा 1961 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 82 सीटें (58.6%)GP: 37 सीटें (26.4%)PSP: 10 सीटें (7.1%)IND: 7 सीटें (5.0%)CPI: 4 सीटें (2.9%)बहुमत के लिए 71140सरकार बनाने के लिए 71
  • INC8258.6%
  • GP3726.4%
  • PSP107.1%
  • निर्दलीय75.0%
  • CPI42.9%
चुनाव की कहानी

आख़िरकार कांग्रेस को बहुमत

क्या हुआ

इस बार कांग्रेस ने अपने दम पर बहुमत जीता और विपक्ष से काफ़ी आगे रही।

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 140 सीटों में से 82 सीटें जीतीं।

यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 11 सीटें ज़्यादा था।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी गणतंत्र परिषद ने 37 सीटें जीतीं।

क्या बदला

इस चुनाव और पिछले चुनाव के बीच सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गई थीं, इसलिए हर सीट पर हुए बदलाव गिने नहीं जा सकते।

अहम आँकड़े

उस मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे कड़ा मुक़ाबला रणपुर, ओडिशा में हुआ, जहाँ फ़ैसला सिर्फ़ 5 वोटों से हुआ; उस साल किसी भी सीट पर यह सबसे कम था।

दूसरे छोर पर, हिंजिली, ओडिशा में इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 76.6% आगे रहा।

पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से बौध, ओडिशा राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 79,622 नाम थे।

सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला नयागढ़, ओडिशा में था, जहाँ एक सीट के लिए 8 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

इस समय तक कांग्रेस और पूर्व रियासतों का गुट विधान सभा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी थे।

कांग्रेस के और आगे निकल जाने के बावजूद गणतंत्र परिषद विपक्ष की सबसे साफ़ आवाज़ बनी रही।

राज्य के आँकड़े पूछें

RBI 2024-25

सभी 140 सीटें