भारी जीत के साथ वापसी
क्या हुआ
कांग्रेस सत्ता में लौटी और पिछली बार उसे हराने वाली पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) ने कुल 147 सीटों में से 118 सीटें जीतीं।
यह अकेले सरकार चलाने के लिए ज़रूरी 74 सीटों के आँकड़े से काफ़ी ऊपर था; एक और भारी जीत।
जनता पार्टी (सेक्युलर) - चौ. चरण सिंह सिर्फ़ 13 सीटों के साथ बहुत पीछे दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
पार्टी ने यहाँ ठीक इसी नाम से पहली बार जीत हासिल की थी।
दोनों चुनावों के बीच उसकी सीटें 26 से 118 हो गईं।
लगभग 45.7% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो पिछले चुनाव से ज़्यादा था।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: सोरो, ओडिशा का फ़ैसला सिर्फ़ 108 वोटों से हुआ।
दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) रायगड़, ओडिशा में रहा, 70.7% वोट।
साल का सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) खंडपड़ा, ओडिशा में दर्ज हुआ, 72.4%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला बोलंगीर, ओडिशा में था, जहाँ बैलट पर 10 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
पहले दो स्थानों पर रही पार्टियों के अलावा विधान सभा की बाक़ी सीटें कुछ छोटे दलों और निर्दलीयों में बँट गईं।
कुल मिलाकर 6 दलों ने सीटें जीतीं, और साथ में 7 निर्दलीय भी जीते।