बीरमहाराजपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
कार्तिक प्रसाद तरिया (INC) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 38.5% वोट पाकर बीरमहाराजपुर सीट जीती और रबीन्द्रायण पाणिग्रही (निर्दलीय) को 6,056 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1971 में सीट नंबर 114 सम्बलपुर थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 114 एकाम्र-भुवनेश्वर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
12.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कार्तिक प्रसाद तरिया | 19,43038.5% | |
| 2 | रबीन्द्रायण पाणिग्रही निर्दलीय | निर्दलीय | 13,37426.5% |
| 3 | सुरेन्द्र प्रधान जनता | जनता | 11,12322.1% |
| 4 | संजीब कुमार साहू निर्दलीय | निर्दलीय | 2,9245.8% |
| 5 | अनिल कलायत निर्दलीय | निर्दलीय | 1,4392.9% |
| 6 | सनत कुमार पाणिग्रही ICS | ICS | 1,2272.4% |
| 7 | बासुदेव प्रधान निर्दलीय | निर्दलीय | 6311.3% |
| 8 | आनंदा च. बेहेरा निर्दलीय | निर्दलीय | 2620.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 87% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.67 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बीरमहाराजपुर से कौन जीता, 1974–2004
INC ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1974 में जीत दर्ज की थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1980 के 39.3% से बढ़कर 50.7% हो गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।
- 1974हृषिकेश होता (INC), जीत का अंतर 14.7%
- 1977सुरेन्द्र प्रधान (JNP), जीत का अंतर 42.5%
- 1980हृषिकेश होता (INC(I)), जीत का अंतर 17.1%
- 1985कार्तिक प्रसाद तरिया (INC), जीत का अंतर 12.0%
- 1990रबिनारायण पाणिग्रही (JD), जीत का अंतर 50.5%
- 1995राम चन्द्र प्रधान (INC), जीत का अंतर 3.9%
- 2000बैष्णब पधान (BJD), जीत का अंतर 7.9%
- 2004संजीब कुमार साहू (BJD), जीत का अंतर 15.4%