सत्ता में ज़ोरदार वापसी
क्या हुआ
विपक्ष ने भारी जीत हासिल की और सत्ताधारी पार्टी से सरकार छीन ली।
भारतीय जनता पार्टी ने कुल 68 सीटों में से 41 सीटें जीतीं।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 43.1% रहा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 23 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
यह निर्णायक जीत थी, और दोनों मुख्य दलों के बीच वोटों का यह बदलाव राज्य में दूर-दूर तक पहुँचा।
राज्य के 68 निर्वाचन क्षेत्रों में से 40 में पिछले चुनाव के मुक़ाबले जीतने वाली पार्टी बदल गई।
इनमें से 26 सीटें सीधे कांग्रेस से भाजपा के पास गईं।
इस दौरान जीतने वाली पार्टी की अपनी सीटें 16 से बढ़कर 41 हो गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव का सबसे क़रीबी मुक़ाबला भरमौर, हिमाचल प्रदेश में रहा, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 16 वोट रहा।
दूसरी ओर, सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला बमसन, हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहाँ विजेता 56.6% वोटों से आगे रहा।
सबसे कम (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) शिमला, हिमाचल प्रदेश में रहा, सिर्फ़ 47.2%।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता कसुम्पटी, हिमाचल प्रदेश में थे, कुल 1,00,023 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
दो राष्ट्रीय दलों के बीच साफ़ तौर पर झूलने वाले इस राज्य में यह एक और बदलाव था।