बराबरी पर छूटा चुनाव
क्या हुआ
यह (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) सदन था।
इंडियन नेशनल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों 31 सीटों पर बराबर रहीं, जो 35 सीटों के आँकड़े से कम था।
वह सिर्फ़ (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में आगे निकली — 43.5% बनाम 39.0%।
क्या बदला
पिछले चुनाव में दबदबा रखने वाली पार्टी की सीटें तेज़ी से घटीं।
उसकी अपनी सीटें 52 से घटकर 31 रह गईं।
राज्य के 68 निर्वाचन क्षेत्रों में से 34 में पिछले चुनाव के मुक़ाबले जीतने वाली पार्टी बदल गई।
इनमें से 19 सीटें सीधे कांग्रेस से भाजपा के पास गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
कुटलैहड़, हिमाचल प्रदेश में बेहद क़रीबी मुक़ाबला हुआ; (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 3 वोट रहा।
दूसरी ओर, सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला रोहडू, हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहाँ विजेता 62.9% वोटों से आगे रहा।
सबसे कम (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) शिमला, हिमाचल प्रदेश में रहा, सिर्फ़ 42.7%।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता कुल्लू, हिमाचल प्रदेश में थे, कुल 79,908 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव से पहले दो मुख्य दलों में से एक से टूटकर एक नई पार्टी बनी थी।