पांवटा दूनविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
रतन सिंह (INC) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 33.5% वोट पाकर पांवटा दून सीट जीती और सुख राम (BJP) को 2,420 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में भी सीट नंबर 18 का नाम पांवटा दून था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 18 धर्मशाला है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.2% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रतन सिंह | 15,56933.5% | |
| 2 | सुख राम NDA | NDA | 13,14928.3% |
| 3 | किरनेश जंग निर्दलीय | निर्दलीय | 12,69727.3% |
| 4 | फतेह सिंह HVC | HVC | 2,9336.3% |
| 5 | राम लाल शर्मा | 9802.1% | |
| 6 | भगत राम | 7811.7% | |
| 7 | असगर अली | 1900.4% | |
| 8 | हेत राम | 1670.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.68 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पांवटा दून से कौन जीता, 1977–2007
INC ने 1993 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 49.3% से घटकर 33.5% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1993 के 81.1% से घटकर 75.9% रह गया। इसके बाद 2003 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।