बराबरी के बाद भारी जीत
क्या हुआ
इस चुनाव में भारी जीत हुई, जो इससे पहले के कड़े मुक़ाबले वाले चुनाव से बिल्कुल अलग थी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 68 सीटों में से 43 सीटें जीतीं।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 41.0% रहा।
भारतीय जनता पार्टी 16 सीटों के साथ काफ़ी पीछे दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
वही पार्टी सत्ता में बनी रही, लेकिन इस बार बहुमत से कहीं ज़्यादा सीटों के साथ।
राज्य के 68 निर्वाचन क्षेत्रों में से 35 में पिछले चुनाव के मुक़ाबले जीतने वाली पार्टी बदल गई।
इनमें से 18 सीटें सीधे भाजपा से कांग्रेस के पास गईं।
जीतने वाली पार्टी की अपनी सीटें 31 से बढ़कर 43 हो गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी 74.4% के साथ राज्य के नए रिकॉर्ड पर पहुँचा।
मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला ऊना, हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 51 वोट रहा।
दूसरी ओर, सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला रामपुर, हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहाँ विजेता 40.9% वोटों से आगे रहा।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता कुल्लू, हिमाचल प्रदेश में थे, कुल 83,947 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
पिछले चुनाव के बँटे हुए परिणाम के बाद राज्य फिर साफ़ दो-दलीय मुक़ाबले पर लौट आया।