त्रिशंकु सदन
क्या हुआ
इस चुनाव के बाद राज्य में किसी एक पार्टी के पास पूरा नियंत्रण नहीं रहा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 68 में से 31 सीटों के साथ आगे रही।
यह बहुमत से कम था, और (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा बनी।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी 29 सीटों के साथ ठीक पीछे रही।
क्या बदला
पिछले चुनाव में भारी जीत दर्ज करने वाली पार्टी का इस बार लगभग पूरा समर्थन खिसक गया।
इनमें से ज़्यादातर सीटें सीधे भाजपा के पास गईं, जिसने अकेले जनता पार्टी से 24 सीटें छीनीं।
फिर भी कांग्रेस अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 35 सीटों के आँकड़े से पीछे रह गई, और त्रिशंकु विधान सभा बनी।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला राजनगर, हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 42 वोट रहा।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार शिमला, हिमाचल प्रदेश में उतरे, बैलट पर 24 उम्मीदवार थे।
दूसरी ओर, मतगणना की सबसे बड़ी जीत जुब्बल-कोटखाई, हिमाचल प्रदेश में हुई, जहाँ जीत का अंतर 71.6% वोट रहा।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) नूरपुर, हिमाचल प्रदेश में दर्ज हुआ, 82.1%।
पृष्ठभूमि
इस बिखरे हुए परिणाम में निर्दलीय उम्मीदवारों और छोटे दलों का असली दबदबा रहा।