बहुत ही कम बहुमत
क्या हुआ
हिमाचल प्रदेश में विपक्ष सत्ता में लौटा, लेकिन बस किसी तरह।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 68 सीटों में से 36 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी 35 सीटों से सिर्फ़ 1 सीटें ज़्यादा था।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 42.8% रहा।
क्या बदला
यह हिमाचल प्रदेश की नए सिरे से तय की गई सीटों की सीमाओं पर हुआ पहला चुनाव था।
कुछ ही समय पहले (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) के ज़रिए सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गई थीं।
सत्ता भी बदली: जीतने वाली पार्टी की अपनी सीटें 23 से बढ़कर 36 हो गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला कसौली, हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 24 वोट रहा।
दूसरी ओर, सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला रोहडू, हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहाँ विजेता 63.5% वोटों से आगे रहा।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से सुलह, हिमाचल प्रदेश सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जहाँ मतदाता सूची में 89,293 नाम थे।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार देहरा, हिमाचल प्रदेश में उतरे, बैलट पर 16 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
यहाँ मुक़ाबला उन्हीं दो राष्ट्रीय दलों के बीच होता है।
इस बार सत्ता बदली, लेकिन बहुमत से मुश्किल से कुछ ही सीटें ज़्यादा थीं।