भाजपा की पहली सरकार
क्या हुआ
इस चुनाव में भाजपा ने राज्य में पहली बार सत्ता हासिल की।
उसने कुल 67 सीटों में से 45 सीटें हासिल कीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 11 सीटें ज़्यादा था।
सत्ता से जा रही इंडियन नेशनल कांग्रेस इस बार दूसरे स्थान पर भी नहीं रही — दूसरा स्थान जनता दल को मिला, जिसने अपने पहले ही चुनाव में 11 सीटें जीतीं।
यह साफ़ तौर पर भारी जीत थी।
क्या बदला
सत्ता से जा रही पार्टी का अपना समर्थन ढह गया, और उसका ज़्यादातर हिस्सा सीधे भाजपा की ओर चला गया।
इनमें से ज़्यादातर सीटें — 38 — सीधे कांग्रेस से भारतीय जनता पार्टी के पास गईं।
एक बिल्कुल नई पार्टी, जनता दल, भी विधान सभा में पहुँची और अपने पहले ही चुनाव में 11 सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला गोपालपुर, हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 440 वोट रहा।
दूसरी ओर, मतगणना की सबसे बड़ी जीत रोहडू, हिमाचल प्रदेश में हुई, जहाँ जीत का अंतर 79.5% वोट रहा।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पांवटा दून, हिमाचल प्रदेश में दर्ज हुआ, 79.6%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से ऊना, हिमाचल प्रदेश सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जहाँ मतदाता सूची में 62,665 नाम थे।
पृष्ठभूमि
यह पहला मौक़ा था जब भाजपा ने अपने दम पर राज्य में सरकार चलाई।