नाहनविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2007
कुश परमार (INC) ने 2007 के विधान सभा चुनाव में 34.4% वोट पाकर नाहन सीट जीती और श्यामा शर्मा (BJP) को 746 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में भी सीट नंबर 19 का नाम नाहन था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 19 पालमपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नाहन का फ़ैसला सिर्फ़ 1.6% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 746 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कुश परमार UPA | UPA | 15,71434.4% |
| 2 | श्यामा शर्मा NDA | NDA | 14,96832.7% |
| 3 | सदा नन्द चौहान NDA | NDA | 13,74130.1% |
| 4 | सुशांत सिंह | 6831.5% | |
| 5 | विनोद कुमार | 3390.7% | |
| 6 | राम कुमार RGD | RGD | 2780.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.17 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹0.74 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
नाहन से कौन जीता, 1977–2007
INC ने यह सीट LJP से छीन ली, जिसने इसे 2003 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1998 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2003 के 78.2% से घटकर 76.4% रह गया।
- 1977श्यामा शर्मा (JNP), जीत का अंतर 44.8%
- 1982श्यामा शर्मा (JNP), जीत का अंतर 32.4%
- 1985अजय बहादुर सिंह (INC), जीत का अंतर 7.5%
- 1990श्यामा शर्मा (JD), जीत का अंतर 23.9%
- 1993कुश परमार (INC), जीत का अंतर 20.9%
- 1998कुश परमार (INC), जीत का अंतर 8.5%
- 2003सदानंद चौहान (LJP), जीत का अंतर 2.9%
- 2007कुश परमार (INC), जीत का अंतर 1.6%