तीन तरफ़ा बँटवारा, बहुमत किसी को नहीं
क्या हुआ
इस चुनाव में जम्मू और कश्मीर की विधान सभा में कोई भी पार्टी अपने दम पर बहुमत के क़रीब नहीं पहुँची।
जम्मू एण्ड कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं, 87 में से 28।
इससे वह 44 सीटों के बहुमत के आँकड़े से काफ़ी पीछे रह गई।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी ने 25 सीटें जीतीं।
क्या बदला
जम्मू और कश्मीर में सत्ता बदली, और सत्ता से जा रही पार्टी का लंबा सिलसिला ख़त्म हुआ।
जम्मू एण्ड कश्मीर नेशनल काँफ्रेंस इससे पहले लगातार 6 चुनाव जीत चुकी थी।
राज्य भर में 87 में से 48 सीटों ने पहले से अलग पार्टी को चुना।
सबसे बड़ा झुकाव जम्मू एण्ड कश्मीर नेशनल काँफ्रेंस से जम्मू एण्ड कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा, जिसने इस तरह अपनी 10 सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला गुरेज, जम्मू और कश्मीर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 141 वोट रहा।
सबसे बड़ा जीत का अंतर जम्मू पश्चिम, जम्मू और कश्मीर में रहा, जहाँ विजेता 51.4% आगे रहे।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) नगरोटा, जम्मू और कश्मीर में रहा, जहाँ यह 83.2% तक पहुँचा।
पूरे राज्य में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को 49,129 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 1.0%।
पृष्ठभूमि
जम्मू एण्ड कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने 1999 में की थी, और 2002 के चुनाव के बाद उसने पहली बार सत्ता में हिस्सेदारी की, जब उसने 87 में से 16 सीटें जीती थीं।1