होमशालीबुगविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2014
अब. मजीद (JKN) ने 2014 के विधान सभा चुनाव में 40.0% वोट पाकर होमशालीबुग सीट जीती और अब्दुल गफ्फार सोफी (JKPDP) को 1,269 वोटों से हराया।
1996 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1987 में सीट नंबर 39 अनन्तनाग थी। 2014 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2024 से सीट नंबर 39 कुलगाम है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। अब. मजीद 4.5% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार + नोटा| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अब. मजीद | 11,40640.0% | |
| 2 | अब्दुल गफ्फार सोफी | 10,13735.5% | |
| 3 | अनायतुल्ला राथर UPA | UPA | 3,82213.4% |
| 4 | गुलाम नबी दार NDA | NDA | 1,5275.3% |
| 5 | अब्दुल बारी नाईक निर्दलीय | निर्दलीय | 7022.5% |
| 6 | मोहम्मद अमीन भट्ट | 3051.1% | |
| 7 | बशीर अहमद भट्ट | 2460.9% | |
| — | नोटा नोटा | नोटा | 2330.8% |
| 8 | मोहम्मद अयूब शेख | 1400.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.25 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
नोटा को कितने वोट मिले?
वोट नोटा (“इनमें से कोई नहीं”) को मिले
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2024 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2024 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
होमशालीबुग से कौन जीता, 1996–2014
JKN ने यह सीट JKPDP से छीन ली, जिसने इसे 2008 में जीता था; JKN ने यहाँ पिछली बार 1996 में जीत दर्ज की थी। 1996 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2008 के 54.4% से घटकर 37.6% रह गया।