कश्मीर समझौते के बाद पहला जनादेश
क्या हुआ
जम्मू और कश्मीर की नेशनल कॉन्फ़्रेंस का नए सिरे से खड़ा हुआ रूप सुरक्षित अंतर से जीतकर ज़ोरदार तरीक़े से सरकार में लौटा।
जम्मू एण्ड कश्मीर नेशनल काँफ्रेंस ने राज्य की 76 सीटों में से 47 सीटें जीतीं, सीटों के हिसाब से यह एकतरफ़ा जीत थी।
इससे वह 39 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 8 सीटें आगे रही।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी जनता पार्टी, जो ख़ुद उस साल बनी एक बिल्कुल नई पार्टी थी, ने 13 सीटें जीतीं।
क्या बदला
सत्ता बदल गई, और सत्ता में आई पार्टी ने इन आँकड़ों में इस नाम से पहले कभी कोई सीट नहीं जीती थी।
जम्मू एण्ड कश्मीर नेशनल काँफ्रेंस की सीटें 0 से 47 हो गईं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) बढ़कर 65.0% हो गया, जो तब तक यहाँ का सबसे ऊँचा था।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला सोपोर, जम्मू और कश्मीर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 33 रहा।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत अनन्तनाग, जम्मू और कश्मीर में रहा, जहाँ 86.6% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से जदीबल, जम्मू और कश्मीर सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 56,400 नाम थे।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला साम्बा, जम्मू और कश्मीर में था, जहाँ 14 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव एक ऐसे राजनीतिक समझौते के बाद हुआ, जिसने हाल ही में राज्य का नेतृत्व बदल दिया था।