विलय के बाद कांग्रेस ने कमान सँभाली
क्या हुआ
इस चुनाव में एक नई पार्टी ने सुरक्षित अंतर से जीतकर जम्मू और कश्मीर की विधान सभा की कमान सँभाली।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने राज्य की 75 सीटों में से 61 सीटें जीतीं, सीटों के हिसाब से यह एकतरफ़ा जीत थी।
इससे वह 38 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 23 सीटें आगे रही।
सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी जम्मू एण्ड कश्मीर नेशनल काँफ्रेंस को सिर्फ़ 8 सीटें मिलीं।
क्या बदला
सत्ता बदल गई, और सत्ता में आई पार्टी ने इन आँकड़ों में इस नाम से पहले कभी कोई सीट नहीं जीती थी।
इस चुनाव में उतरते समय कांग्रेस के पास 0 सीटें थीं; चुनाव के बाद 61।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 39.7% पर लगभग स्थिर रहा।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला खानयार, जम्मू और कश्मीर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 61 रहा।
सबसे बड़ा जीत का अंतर दूसरी ओर गुलाबगढ़, जम्मू और कश्मीर में रहा, जहाँ विजेता कुल वोटों के 92.7% के अंतर से आगे रहे।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत लेह, जम्मू और कश्मीर में रहा, जहाँ 79.7% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला रणबीर सिंह पुरा, जम्मू और कश्मीर में था, जहाँ 8 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
पिछली विधान सभा में सरकार चलाने वाली पार्टी ने यह चुनाव अपने पुराने नाम से नहीं लड़ा।