गुलमर्गविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2014
मोहम्मद अब्बास वानी (JKPDP) ने 2014 के विधान सभा चुनाव में 33.8% वोट पाकर गुलमर्ग सीट जीती और गुलाम हसन मीर (JKDPN) को 2,811 वोटों से हराया।
1996 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1987 में सीट नंबर 14 कंगन थी। 2014 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2024 से सीट नंबर 14 सोनावरी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। मोहम्मद अब्बास वानी 4.1% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार + नोटानाम पर टैप करें
| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मोहम्मद अब्बास वानी | 22,95733.8% | |
| 2 | गुलाम हसन मीर JKDPN | JKDPN | 20,14629.7% |
| 3 | शब्बीर अहमद मीर निर्दलीय | निर्दलीय | 11,08316.3% |
| 4 | शेख मुस्तफा कमल UPA | UPA | 9,27513.7% |
| 5 | तेजिन्दर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,9392.9% |
| — | नोटा नोटा | नोटा | 9171.4% |
| 6 | अब. आहाद शेख AJKMP | AJKMP | 6450.9% |
| 7 | मोहम्मद अकरम मीर निर्दलीय | निर्दलीय | 5470.8% |
| 8 | गु. मोही उद दीन मल्ला | 3960.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.02 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
नोटा को कितने वोट मिले?
वोट नोटा (“इनमें से कोई नहीं”) को मिले
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2024 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2024 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
गुलमर्ग से कौन जीता, 1996–2014
JKPDP ने यह सीट JKDPN से छीन ली, जिसने इसे 2008 में जीता था; JKPDP ने यहाँ पिछली बार 2002 में जीत दर्ज की थी। 1996 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2008 के 59.8% से बढ़कर 71.7% हो गया।