वाम दलों की सत्ता में वापसी
क्या हुआ
सरकार से बाहर रही पार्टी भारी जीत के साथ सत्ता में लौट आई।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने 60 सीटों में से 44 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 13 ज़्यादा था।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 10 सीटों के साथ काफ़ी पीछे दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
बीच के दौर में सरकार चलाने वाली पार्टी से विधान सभा की बड़ी संख्या में सीटें वापस छिन गईं।
पूरे राज्य में 16 सीटें कांग्रेस से माकपा के पास गईं, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव था।
जीतने वाली पार्टी की अपनी सीटें पिछले चुनाव की 26 से बढ़कर इस बार 44 हो गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला मोहनपुर, त्रिपुरा में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 60 वोट रहा।
दूसरी ओर, आशारामबाड़ी, त्रिपुरा में सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला हुआ, जहाँ विजेता 67.2% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) खोवाई, त्रिपुरा में रहा, 87.6%।
सबसे भरा हुआ बैलट अगरतला, त्रिपुरा में था, जहाँ 10 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
प्रतिद्वंद्वी (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के एक कार्यकाल के बाद राज्य का वामपंथी गठबंधन इस चुनाव में सत्ता में लौट आया।
वह वाम मोर्चा के बैनर तले लौटा, और उसके व उसके सहयोगी दलों के पास मिलाकर 46 सीटें थीं।