भारी जीत और रिकॉर्ड मतदान
क्या हुआ
त्रिपुरा की वाम दलों के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी ने भारी जीत हासिल की और सत्ता में उसका दौर और लंबा हुआ।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने 60 में से 46 सीटें जीतीं — बहुमत से काफ़ी ज़्यादा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस सिर्फ़ 10 सीटों के साथ बहुत पीछे रही।
माकपा को 48.0% वोट मिले।
क्या बदला
इस चुनाव में राज्य में (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) का नया रिकॉर्ड भी बना।
लगभग 92.3% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला — राज्य के चुनावों में तब तक दर्ज सबसे ऊँचा हिस्सा।
इस दौरान 7 सीटें कांग्रेस से माकपा के पास चली गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला कुलाई, त्रिपुरा में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 115 वोटों से हुआ।
रामचंद्रघाट, त्रिपुरा में इसका उलटा हुआ, जहाँ विजेता 33.2% वोट से आगे रहा।
किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत खोवाई, त्रिपुरा में दर्ज हुआ, 95.8%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला फटिकराय, त्रिपुरा में था, जहाँ बैलट पर 8 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
यह त्रिपुरा के सत्ताधारी वामपंथी (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) की एक और जीत थी, जो अब बरसों से राज्य का नेतृत्व कर रहा है।
इस चुनाव समेत वह लगातार 7 चुनावों में सबसे आगे रहा है।