बेलोनियाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2008
बसु देव मजूमदार (CPM) ने 2008 के विधान सभा चुनाव में 50.5% वोट पाकर बेलोनिया सीट जीती और अमल मल्लिक (INC) को 1,319 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 36 बीरगंज थी। 2008 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2013 से सीट नंबर 36 शांतिरबाज़ार है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। बसु देव मजूमदार 4.2% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बसु देव मजूमदार वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 15,97150.5% |
| 2 | अमल मल्लिक UPA | UPA | 14,65246.3% |
| 3 | बाबुल चन्द्र पाल CPI(ML)(L) | CPI(ML)(L) | 3331.1% |
| 4 | सुदेब सेन चौधुरी | 2940.9% | |
| 5 | केशव चन्द्र सरकार NDA | NDA | 2930.9% |
| 6 | रतन राय AMB | AMB | 1020.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPM और INC को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.13 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹0.02 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
यह सीट नंबर 2013 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2013 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बेलोनिया से कौन जीता, 1977–2008
CPM ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1998 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 59.1% से घटकर 50.5% रह गया। यह 1983 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2003 के 84.5% से बढ़कर 95.1% हो गया।