त्रिपुरा 1988 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
CPM: 26 सीटें (43.3%)INC: 25 सीटें (41.7%)TUS: 7 सीटें (11.7%)RSP: 2 सीटें (3.3%)बहुमत के लिए 3160सरकार बनाने के लिए 31
चुनाव की कहानी

किसी को बहुमत नहीं, सरकार बदली

क्या हुआ

किसी पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक़ सीटें नहीं मिलीं, और सबसे आगे रही पार्टी आख़िर में सरकार का नेतृत्व नहीं कर पाई।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) 60 में से 26 सीटें जीतकर सबसे आगे रही।

यह बहुमत के लिए ज़रूरी 31 सीटों के आँकड़े से कम था।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 25 सीटें जीतीं।

क्या बदला

पिछले चुनाव के मुक़ाबले विधान सभा की बड़ी संख्या में सीटें दूसरे हाथों में चली गईं।

पूरे राज्य में 13 सीटें माकपा से कांग्रेस के पास गईं, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव था।

माकपा की अपनी सीटें पिछले चुनाव की 37 से घटकर इस बार 26 रह गईं।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला माताबाड़ी, त्रिपुरा में हुआ, जहाँ सिर्फ़ 8 वोट रहा।

पूरे राज्य में 84.6% तक पहुँचा, जो उस समय तक त्रिपुरा में सबसे ज़्यादा था।

दूसरी ओर, आशारामबाड़ी, त्रिपुरा में सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला हुआ, जहाँ विजेता 57.5% वोटों से आगे रहा।

सबसे भरा हुआ बैलट फटिकराय, त्रिपुरा में था, जहाँ 7 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

इसके बजाय एक प्रतिद्वंद्वी ने सरकार बनाई; इससे पहले के चुनाव प्रचार में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी।

राज्य के आँकड़े पूछें

RBI 2024-25

सभी 60 सीटें