रिकॉर्ड मतदान, और बड़ी जीत
क्या हुआ
त्रिपुरा की वाम दलों के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी ने एक और भारी जीत हासिल की, और यह पिछली से भी बड़ी थी।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने 60 में से 49 सीटें जीतीं — हर पाँच में से चार से भी ज़्यादा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 10 सीटों के साथ फिर काफ़ी पीछे रही।
माकपा को 48.1% वोट मिले।
क्या बदला
इस चुनाव में राज्य में (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) का अब तक का रिकॉर्ड भी बना — त्रिपुरा में पंजीकृत मतदाताओं का इतना बड़ा हिस्सा वोट डालने पहले कभी नहीं निकला था।
लगभग 93.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो राज्य के दर्ज इतिहास में सबसे ऊँचा आँकड़ा है।
माकपा ने अपनी सीटें भी बढ़ाईं, पिछले चुनाव की 46 से अब 49।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला रामनगर, त्रिपुरा में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 65 वोटों से हुआ।
ऋष्यमुख, त्रिपुरा में तस्वीर उलटी रही, जहाँ जीत 32.5% वोटों के अंतर से हुई।
किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत ऋष्यमुख, त्रिपुरा में दर्ज हुआ, 96.1%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला करबुक, त्रिपुरा में था, जहाँ बैलट पर 7 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
यह त्रिपुरा के सत्ताधारी वामपंथी (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के सत्ता में लंबे दौर का शिखर था।
वह अब लगातार 8 चुनावों में सबसे आगे रह चुका था।