सीटों का हिसाब जस का तस
क्या हुआ
त्रिपुरा की वाम दलों के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी फिर जीती, और उसकी सीटें लगभग पिछली बार जितनी ही रहीं।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने कुल 60 सीटों में से 38 सीटें जीतीं।
यह पिछले चुनाव में उसकी अपनी सीटों के बराबर था, तब भी 38।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 13 सीटों के साथ फिर दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
परिणाम की कुल तस्वीर लगभग नहीं बदली, लेकिन जिन सीटों पर पार्टी बदली, उनकी अपनी कहानी थी।
4 सीटें कांग्रेस से माकपा के पास चली गईं।
फिर भी माकपा के पास आख़िर में पहले जितनी ही 38 सीटें रहीं।
एक नई पार्टी ने भी राज्य में पहली बार एक सीट जीती: इंडीजेनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ त्विप्रा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला गोलाघाटी, त्रिपुरा में हुआ, जहाँ फ़ैसला एक ही वोट से हुआ — सिर्फ़ 1।
टाकारजला, त्रिपुरा में तस्वीर उलटी रही, जहाँ जीत 58.9% वोटों के अंतर से हुई।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) ऋष्यमुख, त्रिपुरा में दर्ज हुआ, 87.3%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला राधाकिशोरपुर, त्रिपुरा में था, जहाँ बैलट पर 8 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
इससे त्रिपुरा के सत्ताधारी वामपंथी (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) का सत्ता में लंबा दौर और आगे बढ़ा।
वह अब लगातार 6 चुनावों में सबसे आगे रहा है।