कुलाईविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2008
श्री बिजय कुमार ह्रांगखॉल (INPT) ने 2008 के विधान सभा चुनाव में 46.9% वोट पाकर कुलाई सीट जीती और श्रीमती साबित्री देबबर्मा (CPM) को 115 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 48 छामनु थी। 2008 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2013 से सीट नंबर 48 करमछड़ा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
कुलाई का फ़ैसला सिर्फ़ 0.4% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 115 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवारनाम पर टैप करें
| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | श्री बिजय कुमार ह्रांगखॉल INPT | INPT | 14,94446.9% |
| 2 | श्रीमती साबित्री देबबर्मा | 14,82946.5% | |
| 3 | श्री कल्प मोहन त्रिपुरा NDA | NDA | 8772.8% |
| 4 | श्री राज्यराम त्रिपुरा निर्दलीय | निर्दलीय | 7612.4% |
| 5 | श्री पाध्या कुमार देबबर्मा NDA | NDA | 4721.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INPT और CPM को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.29 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹0.03 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
यह सीट नंबर 2013 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2013 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कुलाई से कौन जीता, 1977–2008
INPT ने 2003 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 55.1% से घटकर 46.9% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2003 के 71.5% से बढ़कर 90.5% हो गया।
- 1977कामिनी देब वर्मा (CPM), जीत का अंतर 25.9%
- 1983दिबा चन्द्र ह्रांगखाल (TUS), जीत का अंतर 5.7%
- 1988दिबा चन्द्र ह्रांगखौल (TUS), जीत का अंतर 2.3%
- 1993हसमाई रियांग (CPM), जीत का अंतर 25.2%
- 1998बिजय कुमार ह्रांगखाल (IND), जीत का अंतर 10.3%
- 2003बिजय कुमार ह्रांगखाल (INPT), जीत का अंतर 17.2%
- 2008श्री बिजय कुमार ह्रांगखॉल (INPT), जीत का अंतर 0.4%