कर्नाटक की पहली त्रिशंकु विधान सभा
क्या हुआ
इस चुनाव में किसी एक पार्टी ने अपने दम पर सरकार बनाने लायक़ सीटें नहीं जीतीं।
इससे कर्नाटक में (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा बनी।
जनता पार्टी ने सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं, कुल 95।
यह 113 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम था।
क्या बदला
सरकार चला रही पार्टी बुरी तरह गिरी: विधान सभा की सबसे बड़ी पार्टी से काफ़ी पीछे दूसरे स्थान पर आ गई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस सिर्फ़ 82 सीटें जीत पाई — जिस सरकार की वह अगुवाई कर रही थी, उसके मुक़ाबले भारी गिरावट।
निर्दलीयों ने 22 और सीटें जीतकर पहले से बिखरे परिणाम को और बिखेर दिया।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला बैंदूर, कर्नाटक में रहा, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 24 वोट रहा।
दूसरी ओर, कनकगिरि, कर्नाटक में जीत 62.0% वोटों के अंतर से हुई।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) किरगावल, कर्नाटक में रहा, जहाँ यह 80.5% तक पहुँचा।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला चामराजपेट, कर्नाटक में था, जहाँ 24 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह त्रिशंकु परिणाम ज़्यादा देर अनसुलझा नहीं रहा — जल्द ही एक नई सरकार बन गई।