बँटा हुआ परिणाम, कोई साफ़ विजेता नहीं
क्या हुआ
कर्नाटक का विधान सभा चुनाव (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) परिणाम पर ख़त्म हुआ।
सबसे ज़्यादा सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीतीं, 224 में से 79।
इससे वह बहुमत से काफ़ी पीछे रह गई, ऐसी विधान सभा में जहाँ 13 निर्दलीयों ने भी सीटें जीतीं।
इसके बाद इंडियन नेशनल कांग्रेस 65 सीटों के साथ रही।
क्या बदला
यह बदलाव ज़्यादातर उन सीटों पर हुआ जो पिछली सरकार के पास थीं।
पिछली बार कांग्रेस को जिताने वाले 51 निर्वाचन क्षेत्र इस बार भाजपा के खाते में गए।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) में मुश्किल से बदलाव हुआ: यह 0.3 प्रतिशत अंक बढ़कर लगभग 65.1% हो गया।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
राज्य में सबसे कड़ा मुक़ाबला: संतेमरहल्ली, कर्नाटक का फ़ैसला सिर्फ़ 1 वोट से हुआ — उस साल किसी भी सीट का सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा)।
दूसरी ओर, वेमगल, कर्नाटक में जीत का अंतर 59.7% वोट रहा।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से उत्तरहल्ली, कर्नाटक राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 13,76,130 नाम थे।
असल में कांग्रेस को भाजपा से ज़्यादा (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) मिला, 35.3% बनाम 28.3%, जबकि उसने सीटें कम जीतीं।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव का बँटा हुआ मुक़ाबला राज्य के जनता दल में टूट के बाद हुआ।