जनता सरकार बरक़रार
क्या हुआ
सत्ता में पहले से मौजूद पार्टी फिर जीती, और कर्नाटक की सरकार पर उसकी पकड़ आगे बढ़ी।
जनता पार्टी ने 139 सीटें जीतीं — सीटों के हिस्से के हिसाब से भारी जीत।
इससे वह 113 सीटों के बहुमत के आँकड़े से काफ़ी ऊपर रही: 26 सीटें ज़्यादा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 65 सीटों के साथ फिर दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
सत्ता में पहले से मौजूद पार्टी जीतती रही, और इसकी एक वजह यह थी कि उसने सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी की सीटें अपनी ओर खींचीं।
अब लगातार 2 चुनाव उसी पार्टी के नाम थे।
इनमें से 51 सीटें अकेले कांग्रेस से उसके पास आईं।
दोनों चुनावों के बीच राज्य की 224 सीटों में से कुल 120 सीटों पर पार्टी बदली।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला मूडिगेरे, कर्नाटक में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 33 रहा।
उस साल सबसे ज़्यादा उम्मीदवार बेलगाम, कर्नाटक में थे, जहाँ एक ही सीट के लिए 301 उम्मीदवार मैदान में थे।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) होलेनरसीपुर, कर्नाटक में रहा, जहाँ यह 83.0% तक पहुँचा।
सबसे ज़्यादा मतदाता उत्तरहल्ली, कर्नाटक में थे, मतदाता सूची में 2,56,723 लोग।
पृष्ठभूमि
इस परिणाम ने कर्नाटक में पहली बार सत्ता में आई ग़ैर-कांग्रेसी सरकार को बनाए रखा।