ज़्यादा भीड़ भरे मैदान में लगातार चौथी जीत
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस फिर जीती, लेकिन उसकी स्थिति कमज़ोर होती गई।
कांग्रेस ने 40 सीटों में से 18 सीटें जीतीं, जो 21 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम थीं, यानी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) सदन।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी महाराष्ट्रवादी गोमांतक ने 12 सीटें जीतीं।
क्या बदला
कांग्रेस की जीत का सिलसिला बढ़ता गया, जबकि नए प्रतिद्वंद्वी पहली बार विधान सभा में जगह बनाने लगे।
इसके साथ यहाँ पार्टी लगातार 4 चुनाव जीत चुकी थी।
मैदान में भीड़ भी बढ़ी: 5 दलों ने सीटें आपस में बाँटीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला तालगाव, गोवा में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 72 वोट रहा।
सभी सीटों में सबसे अच्छा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पैंगीण, गोवा में रहा, 80.0%।
राज्य भर का मतदान प्रतिशत भी नई ऊँचाई पर पहुँचा: लगभग 70.0% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
इस बार मारमागोवा, गोवा में राज्य के सबसे ज़्यादा, 30,235 पंजीकृत मतदाता थे।
पृष्ठभूमि
दो चुनावों के बीच के साल राजनीतिक उथल-पुथल वाले रहे; मतदाताओं के फिर वोट डालने से पहले सत्ताधारी (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) कई बार बदला।