गोवा की नई चुनी विधान सभा, बिना बहुमत के
क्या हुआ
इस विधान सभा चुनाव में गोवा की क्षेत्रीय पार्टी ने सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं, लेकिन इतनी नहीं कि अकेले सरकार चला सके।
महाराष्ट्रवादी गोमांतक ने 30 में से 15 सीटें जीतीं।
इससे वह 16 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई, यानी सदन (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) रहा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 10 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
इस प्रोजेक्ट के रिकॉर्ड में इस इलाक़े का यह सबसे पुराना विधान सभा चुनाव है।
इसके बजाय जो बात सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती है, वह है परिणाम का बँटा होना — 4 अलग-अलग दलों ने सीटें जीतीं, और साथ में 2 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी।
हर सीट पर औसतन 4.8 उम्मीदवार मैदान में थे।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
सबसे कड़ी टक्कर दमण, गोवा में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 22 वोट रहा।
उस रात जीत का सबसे बड़ा अंतर मडकई, गोवा में रहा, 37.4% वोट — जिसे वोटों की संख्या में नहीं बल्कि वोटों के हिस्से में मापा गया।
सभी सीटों में सबसे अच्छा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) डिचोली, गोवा में रहा, 71.9%।
दमण, गोवा में इलाक़े के सबसे ज़्यादा, 20,640 पंजीकृत मतदाता भी थे, और यहीं किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार उतरे — कुल 8।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव से एक दशक पहले यह इलाक़ा अपने भविष्य से जुड़ा एक बड़ा सवाल तय कर चुका था।
वह मतदान हारने वाला पक्ष, महाराष्ट्रवादी गोमांतक, फिर भी यहाँ सबसे ज़्यादा सीटें जीत गया।