कांग्रेस फिर जीती, बिना किसी गुंजाइश के
क्या हुआ
गोवा में पहले से सत्ता में मौजूद पार्टी एक और कार्यकाल के लिए बनी रही।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने राज्य की 40 सीटों में से 21 सीटें जीतीं।
यह ठीक 21 सीटों के बहुमत के आँकड़े तक पहुँचा, एक भी सीट ज़्यादा नहीं।
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी 10 सीटों के साथ रही।
क्या बदला
वही पार्टी फिर जीती, फिर भी आँकड़ों में सतह के नीचे असली हलचल दिखी।
पार्टी की अपनी सीटें थोड़ी ही बढ़ीं, 18 से 21।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी भाजपा के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 17.1 प्रतिशत अंक बढ़ा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: डिचोली, गोवा का फ़ैसला सिर्फ़ 90 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, कुडतरी, गोवा में जीत का अंतर 73.7% वोट रहा, जो उस साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर था। यह वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से वास्को द गामा, गोवा राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 33,127 नाम थे।
राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार फोंडा, गोवा में उतरे, कुल 9।
पृष्ठभूमि
इससे उसी पार्टी की जीत का सिलसिला और लंबा हुआ।
इस चुनाव को मिलाकर वह लगातार 5 चुनाव जीत चुकी थी।