आख़िरकार एक पार्टी को साफ़ जीत
क्या हुआ
इस बार एक पार्टी ने किसी और की मदद के बिना गोवा विधान सभा पर पूरा नियंत्रण हासिल किया।
भारतीय जनता पार्टी ने 40 सीटों में से 21 सीटें हासिल कीं।
ये सीटें बहुमत के लिए ठीक उतनी ही थीं, जितनी ज़रूरी थीं — एक भी ज़्यादा नहीं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 9 सीटों के साथ काफ़ी पीछे रही।
क्या बदला
यह गोवा की नए सिरे से तय सीमाओं वाली सीटों पर हुआ पहला चुनाव था।
सीटों की सीमाएँ अभी-अभी (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) से गुज़री थीं।
जीतने वाली पार्टी 14 सीटों से 21 सीटों पर पहुँची।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) लगभग 82.7% तक पहुँचा, जो तब तक गोवा में दर्ज सबसे ऊँचा स्तर था।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: सांगे, गोवा का फ़ैसला सिर्फ़ 483 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, म्हापसा, गोवा में जीत का अंतर 50.3% वोट रहा, जो उस साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर था। यह वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से कानकोन, गोवा राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 31,822 नाम थे।
पृष्ठभूमि
तब तक गोवा को पूर्ण राज्य बने कुछ साल हो चुके थे, और वह अपनी विधान सभा उसी सीट ढाँचे पर चुन रहा था, जो आज भी लागू है।