सबसे ज़्यादा सीटें, पर सबसे ज़्यादा वोट नहीं
क्या हुआ
गोवा का विधान सभा चुनाव फिर किसी भी एक पार्टी के साफ़ बहुमत के बिना ख़त्म हुआ।
(ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) परिणाम में सबसे ज़्यादा सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने जीतीं, 40 में से 17।
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी 13 सीटों के साथ रही।
क्या बदला
हाथ बदलने वाली सीटें कई ओर बिखरीं, लेकिन सबसे ज़्यादा सीटें उस पार्टी के पास गईं जो आख़िर में सबसे आगे रही।
पिछली बार भाजपा को जिताने वाले 6 निर्वाचन क्षेत्र इस बार कांग्रेस के खाते में गए।
एक नई पार्टी ने भी पहली बार विधान सभा में सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
असल में भाजपा के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) कांग्रेस से ज़्यादा था, 28.4% के मुक़ाबले 32.5%, फिर भी सीटों में वह पीछे रही।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: कुंकल्ली, गोवा का फ़ैसला सिर्फ़ 33 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, मडकई, गोवा में जीत का अंतर 58.6% वोट रहा, जो उस साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर था। यह वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।
कुल वोटों में से लगभग 1.2% (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को गए।
पृष्ठभूमि
तब तक गोवा कई सालों से अपनी राज्य विधान सभा चुन रहा था।