लंबा सिलसिला त्रिशंकु परिणाम पर ख़त्म
क्या हुआ
सालों से गोवा की अगुवाई कर रही पार्टी अपनी जगह खो बैठी, और इस बार कोई भी पार्टी अकेले सरकार नहीं चला सकी।
(ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) परिणाम में सबसे ज़्यादा सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीतीं, 40 में से 17।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 16 सीटों के साथ ठीक पीछे रही।
क्या बदला
यह बदलाव उन सीटों से आया, जो पिछली सरकार के पास थीं।
पिछली बार कांग्रेस को जिताने वाले 5 निर्वाचन क्षेत्र इस बार भाजपा के खाते में गए।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी 5.2 प्रतिशत अंक बढ़कर लगभग 68.7% पर पहुँचा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
असल में कांग्रेस के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) भाजपा से ज़्यादा था, 35.6% के मुक़ाबले 38.4%, फिर भी सीटों में वह पीछे रही।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: सांताक्रूज, गोवा का फ़ैसला सिर्फ़ 40 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, धारगल, गोवा में जीत का अंतर 50.4% वोट रहा, जो उस साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर था। यह वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।
राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार सांताक्रूज, गोवा में उतरे, कुल 11।
पृष्ठभूमि
यह उस दौर के बाद हुआ, जिसमें गोवा की सरकारें असामान्य रूप से बार-बार बदली थीं।