कांग्रेस की वापसी, फिर भी बहुमत नहीं
क्या हुआ
अभी-अभी सत्ता गँवाने वाली पार्टी लौट आई, फिर भी अकेले सरकार चलाने लायक़ सीटों से पीछे रही।
(ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) परिणाम में सबसे ज़्यादा सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने जीतीं, 40 में से 16।
इससे वह बहुमत से पीछे रह गई, और 2 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी सीटें जीतीं।
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी 14 सीटों के साथ रही।
क्या बदला
लौटने वाली पार्टी सीटों के हिसाब से लगभग ठीक वैसी ही थी, जैसी पहले थी।
उसकी सीटों में बहुत मामूली बदलाव हुआ: 16 से 16।
एक नई पार्टी ने भी पहली बार विधान सभा में एक सीट जीती।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
राज्य में कहीं भी सबसे कड़ा मुक़ाबला: पैंगीण, गोवा में फ़ैसला सिर्फ़ 200 वोटों से हुआ — उस साल किसी भी सीट पर जीत का सबसे कम अंतर।
दूसरी ओर, मडकई, गोवा में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 39.7% वोट रहा।
राज्य में सबसे कम (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) वास्को द गामा, गोवा में रहा, 58.6%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से फोंडा, गोवा राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 37,068 नाम थे।
पृष्ठभूमि
इससे गोवा में किसी एक पार्टी का पूरा नियंत्रण फिर नहीं बन सका।