पणजीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
पर्रिकर प्रभु मनोहर (BJP) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 51.5% वोट पाकर पणजी सीट जीती और प्रभु केशव लक्ष्मीधर (INC) को 2,749 वोटों से हराया।
1989 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1984 में भी सीट नंबर 10 का नाम पणजी था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 10 हलदोणे है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — पर्रिकर प्रभु मनोहर 26.3% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पर्रिकर प्रभु मनोहर NDA | NDA | 5,39651.5% |
| 2 | प्रभु केशव लक्ष्मीधर | 2,64725.3% | |
| 3 | फुर्तादो सुरेन्द्र क्रिस्टोवन GRCP | GRCP | 1,31512.6% |
| 4 | गोंसाल्वेस जुवांव बपतिस्ता फ्लोरियानो निर्दलीय | निर्दलीय | 5735.5% |
| 5 | न्यून्स वेरो लुईस जुवांव | 3503.3% | |
| 6 | देशप्रभु मोहन आनंदराव UGDP | UGDP | 1471.4% |
| 7 | बांदोडकर सुवर्णा सुन्दर GVP | GVP | 430.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, INC और GRCP को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.86 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पणजी से कौन जीता, 1989–2007
BJP ने 1994 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 44.4% से बढ़कर 51.5% हो गया। मतदान प्रतिशत 1994 के 61.3% से घटकर 56.3% रह गया। इसके बाद 2002 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।