पणजीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
जोआन बाप्तिस्ता फ्लोरिनी गोंसाल्वेस (INC) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 39.6% वोट पाकर पणजी सीट जीती और पुष्पशील कृष्ण केरकर (MAG) को 1,068 वोटों से हराया।
1989 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1984 में भी सीट नंबर 10 का नाम पणजी था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 10 हलदोणे है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
10.6% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जोआन बाप्तिस्ता फ्लोरिनी गोंसाल्वेस | 3,98339.6% | |
| 2 | पुष्पशील कृष्ण केरकर | 2,91529.0% | |
| 3 | इरास्मो दे सिकेरा GLP | GLP | 2,67226.6% |
| 4 | माधव मनोहत धोंड | 2692.7% | |
| 5 | माधव रामकृष्ण बीर राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 1431.4% |
| 6 | जेवियर क्रिश्तानो फुर्तादो निर्दलीय | निर्दलीय | 610.6% |
| 7 | अरविन्द वाई. करपुकर निर्दलीय | निर्दलीय | 80.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.20 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पणजी से कौन जीता, 1989–2007
इसके बाद 1994 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।