सालगांवविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
डी. सूज़ा विल्फ्रेड टीटो फ़र्मिनो (GRCP) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 35.9% वोट पाकर सालगांव सीट जीती और कलंगुटकर दिलीप सोनू (MAG) को 464 वोटों से हराया।
1989 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1984 में सीट नंबर 8 पाले थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 8 कलंगुट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। डी. सूज़ा विल्फ्रेड टीटो फ़र्मिनो 3.3% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | डी. सूज़ा विल्फ्रेड टीटो फ़र्मिनो GRCP | GRCP | 5,00635.9% |
| 2 | कलंगुटकर दिलीप सोनू | 4,54232.6% | |
| 3 | मलिक श्रीकांत केशव | 2,16915.6% | |
| 4 | मांद्रेकर गोरख राजाराम NDA | NDA | 1,58311.4% |
| 5 | नावेलकर अमोल प्रभाकर UGDP | UGDP | 2681.9% |
| 6 | पेड़णेकर रामा दत्ताराम निर्दलीय | निर्दलीय | 2661.9% |
| 7 | गुरव बाबुराव विठ्ठल | 930.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 84% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.66 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सालगांव से कौन जीता, 1989–2007
GRCP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1994 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1989 से शुरू होता है, यह GRCP की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1994 के 75.4% से घटकर 67.7% रह गया। इसके बाद 2002 के चुनाव में यह सीट NCP ने जीती।