डिचोलीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1994
भाटले पांडुरंग कृष्ण (INC) ने 1994 के विधान सभा चुनाव में 35.4% वोट पाकर डिचोली सीट जीती और राऊत पांडुरंग दत्ताराम (निर्दलीय) को 318 वोटों से हराया।
1989 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1984 में सीट नंबर 15 फोंडा थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 15 कुंभारजुवे है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। भाटले पांडुरंग कृष्ण 2.2% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | भाटले पांडुरंग कृष्ण | 5,13535.4% | |
| 2 | राऊत पांडुरंग दत्ताराम निर्दलीय | निर्दलीय | 4,81733.2% |
| 3 | एड. परब कालिदास विठोबा | 4,12728.4% | |
| 4 | बेग हाशम नुर मोहम्मद निर्दलीय | निर्दलीय | 2581.8% |
| 5 | मिसाल दरी बाबू | 1851.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.16 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
डिचोली से कौन जीता, 1989–2007
INC ने यह सीट MAG से छीन ली, जिसने इसे 1989 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1989 के 74.8% से बढ़कर 75.6% हो गया। इसके बाद 1999 के चुनाव में यह सीट MAG ने जीती।