सिक्किम 1994 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
SDF: 19 सीटें (59.4%)SSP: 10 सीटें (31.3%)INC: 2 सीटें (6.3%)IND: 1 सीट (3.1%)बहुमत के लिए 1732सरकार बनाने के लिए 17
  • SDF1959.4%
  • SSP1031.3%
  • INC26.3%
  • निर्दलीय13.1%
चुनाव की कहानी

एक दौर का अंत

क्या हुआ

सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने अपने पहले ही चुनाव में सिक्किम संग्राम परिषद को भारी अंतर से हराकर सिक्किम में एक दशक से चला आ रहा एक पार्टी का राज ख़त्म कर दिया।

उसने 32 सीटों में से 19 सीटें जीतीं।

इससे वह बहुमत के आँकड़े से 2 सीटें आगे रही।

एसडीएफ ने 42.0% वोट पाकर 59.4% सीटें जीतीं।

सिक्किम संग्राम परिषद 35.1% वोट के साथ 10 सीटों पर सिमट गई।

चुनाव प्रचार

पवन चामलिंग ने 4 मार्च 1993 को सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट की स्थापना की, और इस नई पार्टी ने अगले साल विधान सभा चुनाव जीत लिया।1

17 मई 1994 को विधान सभा में नर बहादुर भंडारी की सिक्किम संग्राम परिषद मंत्रिपरिषद का विश्वास प्रस्ताव गिर गया। संचमान लिम्बू सदन के नेता चुने गए और उन्होंने बाक़ी कार्यकाल के लिए नई सरकार बनाई; इससे नवंबर के चुनाव से कुछ महीने पहले भंडारी का मुख्यमंत्री काल ख़त्म हो गया।2

चुनाव आयोग ने 16 नवंबर 1994 को सिक्किम की पाँचवीं विधान सभा की 32 सीटों के लिए मतदान कराया। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, सिक्किम संग्राम परिषद, इंडियन नेशनल कांग्रेस, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) ने उम्मीदवार उतारे, और इनके साथ 76 निर्दलीय भी मैदान में थे।3

स्रोत
  1. 1 wikipedia.org
  2. 2 sikkim.gov.in wikipedia.org (1) wikipedia.org (2)
  3. 3 wikipedia.org sikkim.gov.in

क्या बदला

सिक्किम संग्राम परिषद की जीत का सिलसिला बुरी हार के साथ ख़त्म हुआ।

इससे पहले वह लगातार 3 चुनाव जीत चुकी थी।

सबसे बड़ा बदलाव सिक्किम संग्राम परिषद से एसडीएफ की ओर रहा: जिन 22 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 19 इसी तरह बदलीं।

एसडीएफ पिछले चुनाव के समय मौजूद ही नहीं थी; वह 0 सीटों से इस बार 19 सीटों पर पहुँची।

पिछले चुनाव के मुक़ाबले 10.3 प्रतिशत अंक बढ़ा।

अहम आँकड़े

सबसे क़रीबी मुक़ाबला लूसिंग पाचेखानी, सिक्किम में हुआ, जहाँ 12 वोट रहा।

उस साल सबसे बड़ा जीत का अंतर दमथांग, सिक्किम में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 43.9% वोट आगे रहा।

रालंग, सिक्किम में किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ, 84.2%।

गंगटोक, सिक्किम पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से राज्य की सबसे बड़ी सीट थी, जिसकी मतदाता सूची में 9,960 नाम थे, और यहीं सबसे ज़्यादा उम्मीदवार भी थे: 12।

पूरे राज्य का मतदान प्रतिशत 79.7% तक पहुँचा, जो तब तक सिक्किम में दर्ज सबसे ऊँचा था।

पृष्ठभूमि

अप्रैल 1975 के जनमत संग्रह के बाद भारतीय संसद के 36वें संविधान संशोधन ने चोग्याल राजशाही ख़त्म की, और 16 मई 1975 को सिक्किम भारत का 22वाँ राज्य बना; काज़ी लेंदुप दोरजी इसके पहले मुख्यमंत्री बने।4

1984 में मुख्यमंत्री नर बहादुर भंडारी ने 1979 से सिक्किम की सरकार चला रही पार्टी, सिक्किम जनता परिषद, को भंग करके सिक्किम संग्राम परिषद बनाई, जिसने 1985 में 32 में से 30 सीटें और 1989 में जिन सभी 32 सीटों पर वह लड़ी, वे सब जीतीं।5

स्रोत
  1. 4 wikipedia.org
  2. 5 wikipedia.org

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RBI 2024-25

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