सिक्किम की सरकार ने लगभग हर सीट जीती
क्या हुआ
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने तीसरा कार्यकाल जीता और सदन की लगभग हर सीट अपने नाम की।
एसडीएफ ने 32 सीटों में से 31 सीटें हासिल कीं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस अकेली दूसरी पार्टी थी जिसने कोई सीट जीती, और वह भी सिर्फ़ 1।
क्या बदला
एकतरफ़ा सीटों के पीछे पिछले चुनाव के मुक़ाबले बदलाव भी काफ़ी बड़ा था।
पिछले चुनाव से तुलना की गई 32 सीटों में से 8 पर पार्टी बदली।
उस साल 4 सीटों पर कोई मुक़ाबला नहीं हुआ — निर्विरोध जीत, यानी ऐसी सीट जहाँ सिर्फ़ एक उम्मीदवार खड़ा था, इसलिए फ़ैसले के लिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: संघ, सिक्किम का फ़ैसला सिर्फ़ 88 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, चाकुंग, सिक्किम 91.6% वोट के अंतर से जीती गई — उस साल राज्य के सबसे एकतरफ़ा परिणामों में से एक।
जोंगू, सिक्किम में उस साल राज्य की सभी सीटों में सबसे ऊँचा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) दर्ज हुआ: 86.7%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से गंगटोक, सिक्किम राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 14,280 नाम थे।
पृष्ठभूमि
यह पहले से ही लगातार जीतों का सिलसिला था।
अब वह लगातार 3 चुनाव जीत चुकी थी।