सिक्किम की सरकार की भारी जीत के साथ वापसी
क्या हुआ
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने भारी जीत के साथ दूसरा कार्यकाल जीता, और उसका मुख्य प्रतिद्वंद्वी लगभग शून्य सीटों पर सिमट गया।
एसकेएम ने 32 सीटों में से 31 सीटें हासिल कीं।
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के पास सिर्फ़ 1 सीट बची — अपनी पिछली स्थिति से भारी गिरावट।
क्या बदला
पिछली बार बस किसी तरह बहुमत पार करने वाली पार्टी अब विधान सभा में पूरी तरह हावी है।
उसकी सीटें 17 से 31 हो गईं।
यानी एक ही चुनाव में 14 सीटों की बढ़त।
यह ज़्यादातर बदलाव सीधे उसके प्रतिद्वंद्वी से आया: 15 सीटें एसडीएफ से एसकेएम के पास गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: लाचेन मंगन, सिक्किम का फ़ैसला सिर्फ़ 851 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, जोंगू, सिक्किम में जीत का अंतर 54.0% वोट रहा।
उस साल राज्य में सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) जोंगू, सिक्किम में रहा, 88.2%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से चुजाचेन, सिक्किम राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 18,749 नाम थे।
पृष्ठभूमि
इससे एसकेएम की लगातार जीतों का सिलसिला आगे बढ़ा।
अब वह लगातार 2 चुनाव जीत चुकी थी।