नई पार्टी के हाथ में कमान
क्या हुआ
एक नई पार्टी ने विधान सभा की लगभग हर सीट जीती और राज्य की पिछली सरकार की जगह पूरी तरह ले ली।
सिक्किम संग्राम परिषद ने 32 में से 30 सीटें जीतीं — राज्य विधान सभा में भारी बहुमत।
सत्ता से बाहर हो रही सिक्किम जनता परिषद बुरी तरह हारी और उसे गिनी-चुनी सीटें ही मिलीं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस बहुत पीछे दूसरे स्थान पर रही, जिसके पास अपनी सिर्फ़ 1 सीट थी।
क्या बदला
यह असली बदलाव था: जाने-पहचाने प्रतिद्वंद्वियों के बीच अदला-बदली के बजाय एक बिल्कुल नई पार्टी ने राज्य सरकार पर पूरा नियंत्रण कर लिया।
पिछले चुनाव के समय यह पार्टी मौजूद ही नहीं थी; यह 16 सीटों से 30 सीटों पर पहुँची।
लगभग हर सीट पर पार्टी बदली: तुलना की गई 32 सीटों में से 32 किसी दूसरी पार्टी के पास चली गईं।
अहम आँकड़े
परिणाम के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला संघ, सिक्किम में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 34 वोटों से हुआ।
पूरे राज्य में सिक्किम संग्राम परिषद के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 62.2% रहा।
दूसरी ओर, खामदोंग, सिक्किम में उस रात का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) रहा, जहाँ विजेता 63.9% से आगे रहा।
सबसे भरा हुआ बैलट गंगटोक, सिक्किम में था, जहाँ 12 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
जीतने वाली पार्टी बिल्कुल नई थी; इसकी स्थापना इस चुनाव से सिर्फ़ एक साल पहले हुई थी।