सिक्किम में सरकार बदली
क्या हुआ
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट बरसों में पहली बार सत्ता से बाहर हुई; उसे एक नए प्रतिद्वंद्वी ने हटाया।
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने 32 सीटों में से 17 सीटें जीतीं।
इससे उसके पास 17 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 0 सीटें ज़्यादा थीं।
सत्ता से बाहर हुई एसडीएफ ने फिर भी 15 सीटें जीतीं — लगभग जीतने वाली पार्टी जितनी।
क्या बदला
दोनों सबसे आगे रहे दलों के बीच फ़ासला सीटों का था, इस बात का नहीं कि कितने लोगों ने उन्हें वोट दिया।
(कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में असल में एसडीएफ एसकेएम से थोड़ा आगे रही — 47.6% के मुक़ाबले 47.0%।
10 सीटें एसडीएफ से एसकेएम के पास गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: यांगथांग, सिक्किम का फ़ैसला सिर्फ़ 47 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, जोंगू, सिक्किम में जीत का अंतर 35.4% वोट रहा।
उस साल राज्य में सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) जोंगू, सिक्किम में रहा, 88.4%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से चुजाचेन, सिक्किम राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 17,776 नाम थे।
पृष्ठभूमि
अभी-अभी सत्ता गँवाने वाली पार्टी बरसों से बिना रुके सिक्किम में सरकार चला रही थी।