फिर से हर सीट
क्या हुआ
राज्य की सिक्किम संग्राम परिषद ने विधान सभा की हर एक सीट जीती, और कोई ज़मीन खोए बिना सत्ता पर अपनी पकड़ आगे बढ़ाई।
सिक्किम संग्राम परिषद ने कुल 32 में से सभी 32 सीटें जीतीं — एक भारी जीत।
उसकी सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, अपनी सिर्फ़ 0 सीटें जीत पाई।
क्या बदला
यह बदलाव से ज़्यादा निरंतरता थी: पिछले चुनाव में हावी रही वही पार्टी फिर जीती, बस और भी पूरी तरह।
पिछले चुनाव के मुक़ाबले, तुलना की गई 32 सीटों में से सिर्फ़ 2 पर पार्टी बदली।
लगभग 69.4% पंजीकृत मतदाता वोट डालने आए; यह हिस्सा भी पिछले चुनाव से बढ़ा।
अहम आँकड़े
परिणाम के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला लूसिंग पाचेखानी, सिक्किम में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 293 वोटों से हुआ।
पूरे राज्य में कांग्रेस के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 18.1% रहा, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली।
दूसरी ओर, दमथांग, सिक्किम में उस रात का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) रहा, जहाँ विजेता 88.5% से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) असम-लिंगजे, सिक्किम में रहा, जहाँ 78.1% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में जीतने वाली पार्टी वही थी, जिसे कुछ साल पहले राज्य के पिछले नेतृत्व ने बनाया था।